Tuesday, October 27, 2009
प्रोफेशनल युवाओं में बढता तनाव
आज के दौर में हर कोई अच्छी और प्रोफेशनल शिक्षा पाना चाहता है । और हो भी क्यों न !आख़िर इस प्रतियोगिता के दौर में कोई भी पीछे नही रहना चाहता है । आज की शिक्षा प्रणाली काफी बदल भी गई है और छात्रों पर लगातार अच्छा करने का दबाव भी रोज़ बढता ही जा रहा है । दरअसल तरक्की करना कोई बुरी बात नही है लेकिन तरक्की इस राह पर चलते हुए अपने संस्कारों और आदर्शों को ताक पर रख देना सायद आज के युवाओं की जरूरत बन गया है ।मांबाप के साए से दूर रह रहे युवाओं में अपनीमहत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कुंठा इस कदर हावी हो चुकी है की वो कोई भी कदम उठाने से पीछे नही हटते। जरा यहाँ कुछ उदाहरणों को ही ले लीजिये यहाँ युवाओं की विक्षिप्त मानसिकता साफ़ झलकती है ।राजधानी दिल्ली में आई आई टी के छात्र ने मणिपुर की छात्रा के साथ दुष्कर्म करने की कोशिश की और फिर उसे मौत के घाट उतार दिया । उधर मेरठ में भी एक छात्र की सिरफिरी आशिकी उस सहपाठी छात्रा की जानले ली । कुछ दूसरे वाकयों पर गौर करें तो कुछ दिन पहले उड़ीसा से लुटेरे छात्रों का गिरोह गिराग्तार हुआ जिसका सरदार भी ऍम बी ऐ का ही छात्र था । दिल्ली एअरपोर्ट पर एक प्रोफेशनल छात्र ने विमान में बम होने की झूटी अफवाह इसलिए फैलाई क्योंकि उससे विमान छोट जाने का दसर था । पहले दो वाकयों पर गौर करें तो पायेंगे की आज के युवाओं में प्यार के नाम पर पश्चिमी संस्कृति का पूहर्पण हावी हो गया है । भारतीय संस्कृति में प्यार में कोई जान नही ले सकता । वैसे भी जिस देश में लैला मजनू ,सीरी फरहाद , और हीर राँझा के अमर प्रेम के किस्से मशहूर हों वहां प्यार के नाम पर बह्सीपन सिर्फ़ पश्चिमी संस्कृतिका प्रभाव ही दर्शाता है । दरअसल इन घटनाओं से साफ़ है की आज के युवाओं में किस कदर कुंठा और बदले की भावना घर कर रही है । यह सब आधुनिकता का ही एक चेहरा है । दरअसल माँ बाप अगर घर में ही बच्चे को अच्छे संस्कारों के लिए सीख देंगे तो बच्चे आगे जाकर अपने संस्कारों का कहीं न कहीं लिहाज रखेंगे । आज युवा को फैशन के साथ साथ अपने करियर और ज्यादा पैसा कमाने का जो भूत स्वर हो गया है उससे कहीं न कहीं उके मन में भटकाव पैदा हो रहा है । इस विकत स्थिति से युवाओं को नैतिक और चारित्रिक रूप से मजबूत बनाने और उनमे आत्मविश्वास जगाने का काम सिर्फ़ माँ बाप ही कर सकते हैं । दूसरी बात जो उनके मन में bharni होगी वो ये है की जिंदगी में पैसे से ज्यादा aham है अपना vajood और wajood अपने मजबूत संस्कारों में ही nihit होता है । खैर जिंदगी सब अपने अपने तरीके से जीते हैं और कोई भी किसी को रोक tok नही सकता लेकिन अगर इस भोग vilaas के karan ऐसे ghatnayen badti गई तो समाज के लिए एक nasoor भी बन सकता है ।
Sunday, October 25, 2009
विधान सभा चुनाव कांग्रेस की जीत या विपक्ष की हार
हाल ही में तीन राज्यों में विधान सभा चुनाव संपन्न हो गए हैं । जैसे की चुनाव से पूर्व अनुमान लगाया जा रहा था की हर जगह कांग्रेस को ही बढ़त मिलेगी और नतीजों से भी यही साबित हुआ । तीनोराज्यों में कांग्रेस ने विरोधियों का क्लीन स्वीप कर दिया । सबसे ख़ास बात रही महारास्ट्र में जहाँ पर शिवसेना भाजपा गठबंधन को करारा झटका लगा । कम से कम विपक्षी गटबंधन तो यह आस लगाये बैठा था की कांग्रेस को यहाँ तो कढ़ी टक्कर मिलेगी लेकिन राज फैक्टर कहें या यूँ कहें की कांग्रेस पर जनता का भरोंसा ने कांग्रेस को सत्ता में बनाये रखा । बात अगर हरियाणा की करें तो यहाँ हुड्डा को अति आत्मविश्वास था की सरकार तो उनकी बनानी ही है लेकिन उनको पिछली बार से जादा सीटें मिलने का अनुमान था । लेकिन चौटाला की तारीफ करनी होगी की बिना गठबंधन के ही कांग्रेस को पूरी टक्कर दी । हरियाणा के नतीजों से साफ़ था की जनता काम में विस्वास रखती है लेकिन अगर थोडी सी काम में कोताही बरती गई तो जनता उसका जवाब भी दे सकती है । हुड्डा को भी सायद ये बात अब समझ आ गई होगी की अगर भाजपा इनेलो गठबंधन बना होता तो सायद हुड्डा सत्ता में न होते । अब अगर महारास्ट्र दस चुनावी नतीजों पर गौर करें तो जनता का फ़ैसला कांग्रेस पर अभी भी कायम है । लेकिन एक बात यहाँ साफ़ है की समस्याएँ अभी रत्ती भर भी कम नहीं हुई हैं । किसानो की आत्महत्याएं बिजली का संकट बदती महंगाई मुदे तमाम है पिछली सरकार की नाकामी को गिनने के लिए लेकिन विपक्ष अपने अंतर्कलह में इतना मशगूल रहा की उसे जनता की जरा सी भी परवाह नही रही । किसी भी राज्य में विपक्षी दल की ख़ास भूमिका होती है ताकि सरकार जनता के मुद्दों को दरकिनार न कर सके । मगर महारास्ट्र में विपक्ष अपनी सकारात्मक भूमिका निभाने में नाकाम रहा । इसी वजह से कांग्रेस ने जनता का पूरा समर्थन न होने के बावजूद सरकार बनाई । अतः ये बात सभी को ध्यान में रख लेनी चाहिए की जनता का फ़ैसला जिस तरह से सर्वमान्य होता है उसी तरह से उसके हित और उसकी समस्याएँ सबसे पहले हैं ।
Sunday, October 11, 2009
Wednesday, October 7, 2009
राष्ठ्रमंडल खेल
दिल्ली में अगले साल होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर अभी भी दुविधा की स्थिथि बनी हुई है । इस महायोजन को सफल बनाकर हम दुनिया को बता सकते थे की हम खेलों की भी महासक्ति हैं । मगर राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर चल रही तैयारिओं को देखकर भी कोई कहे किहम सफल आयोजन कर लेंगे तो यहाँ सरासर बेमानी होगी । पिछले चार पाँच सालों में दिल्ली सरकार भारतीय ओलंपिक संघ हाथ पर हाथ धरे बैठे रहा जिसका विपरीत असर निर्माण कार्यों पर पड़ा । खेल गाँव से लेकर जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम जैसी महत्वपूण जगहों पर भी काम कछुआ चाल से हुआ जो कि अभी तक मात्र ३० से ४० फीसदी तक ही पूरा हुआ है राष्ट्रमंडल खेलों में एक साल से भी कम का समय बचा हुआ है और ऐसे में सरकार और ओलंपिक संघ के हाथ पाँव फूल गए हैं । वो तो सुकर है मीडिया का कि जिसने सही समय पर ये मुद्दा उछालकर सरकार को नींद से जगाया है । अब सरकार जल्दबाजी में केन्द्र सरकार से हस्तक्षेप कि मांग कर रही है । वहीँ इस मुददे पर चर्चा करने व तैयारिओं का जायजा लेने के लिए जब राष्ट्रमंडल लघ के अध्यक्ष माइक फेनेल दिल्ली दौरे पर आए तो आई ओ सी ने उन्हें केवल कुछ ही जगहों भ्रमण करवाया जहाँ पर निर्माण कार्य संतोषजनक था । हालाँकि अभी भी सभी देशों का प्रतिनिधिमंडल खेलों कि तैयारिओं का जायजा लेने के लिए दिल्ली में ही है और ११ अक्टूबर को होने वाली बैठक के बाद ही यह तय करेंगे कि भारत मेजबानी करने लायक है भी या नहीं , इस बात पर सभी भारतवासियों कि निगाहें टिकी हैं । और अगर इसमे कोई कमी रह गई तो विदेशों में हमारी कैसी छवि जायेगी यह एक chinta का vishaya है काश कि हमारी सरकार पहले से जाग jaati तो आज hame इस कदर जल्दबाजी नही dikhani parhti auor हम mehmaano का स्वागत करने के लिए गर्व ser khare होते ।
dhanayavaad
dhanayavaad
Sunday, October 4, 2009
aaz se maine ek nai suruaat kar di hai ... apne is blog ke jariye main aap logon tak apni aawaz pahunchane ki koshish kar raha hoon magar kewal shabdon ke madhyam se ......
aasha hai ki aap meri is koshish me hamesha saath denge aur apne keemti sujhavon se bhi mujhe avagat karayenge......
dhanyavaad...
aasha hai ki aap meri is koshish me hamesha saath denge aur apne keemti sujhavon se bhi mujhe avagat karayenge......
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