Wednesday, October 7, 2009

राष्ठ्रमंडल खेल

दिल्ली में अगले साल होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर अभी भी दुविधा की स्थिथि बनी हुई है । इस महायोजन को सफल बनाकर हम दुनिया को बता सकते थे की हम खेलों की भी महासक्ति हैं । मगर राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर चल रही तैयारिओं को देखकर भी कोई कहे किहम सफल आयोजन कर लेंगे तो यहाँ सरासर बेमानी होगी । पिछले चार पाँच सालों में दिल्ली सरकार भारतीय ओलंपिक संघ हाथ पर हाथ धरे बैठे रहा जिसका विपरीत असर निर्माण कार्यों पर पड़ा । खेल गाँव से लेकर जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम जैसी महत्वपूण जगहों पर भी काम कछुआ चाल से हुआ जो कि अभी तक मात्र ३० से ४० फीसदी तक ही पूरा हुआ है राष्ट्रमंडल खेलों में एक साल से भी कम का समय बचा हुआ है और ऐसे में सरकार और ओलंपिक संघ के हाथ पाँव फूल गए हैं । वो तो सुकर है मीडिया का कि जिसने सही समय पर ये मुद्दा उछालकर सरकार को नींद से जगाया है । अब सरकार जल्दबाजी में केन्द्र सरकार से हस्तक्षेप कि मांग कर रही है । वहीँ इस मुददे पर चर्चा करने व तैयारिओं का जायजा लेने के लिए जब राष्ट्रमंडल लघ के अध्यक्ष माइक फेनेल दिल्ली दौरे पर आए तो आई ओ सी ने उन्हें केवल कुछ ही जगहों भ्रमण करवाया जहाँ पर निर्माण कार्य संतोषजनक था । हालाँकि अभी भी सभी देशों का प्रतिनिधिमंडल खेलों कि तैयारिओं का जायजा लेने के लिए दिल्ली में ही है और ११ अक्टूबर को होने वाली बैठक के बाद ही यह तय करेंगे कि भारत मेजबानी करने लायक है भी या नहीं , इस बात पर सभी भारतवासियों कि निगाहें टिकी हैं । और अगर इसमे कोई कमी रह गई तो विदेशों में हमारी कैसी छवि जायेगी यह एक chinta का vishaya है काश कि हमारी सरकार पहले से जाग jaati तो आज hame इस कदर जल्दबाजी नही dikhani parhti auor हम mehmaano का स्वागत करने के लिए गर्व ser khare होते ।


dhanayavaad

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