Sunday, February 14, 2010

तो किसका हुआ फायदा ?

पिछले हफ्ते शिवसेना और शाहरुख़ के बीच काफी कुछ ऐसा हुआ जो नहीं होना छाहिये था । किंग खान ने आई पी एल में पाकिस्तानी खिलाडियों को खिलाने को लेकर बात क्या छेड़ दी की महाराष्ट्र में बवंडर हो गया । शिवसेना ने शाहरुख़ के खिलाफ जबरदस्त मोर्च खोल दिया और हर जगह खान की फिल्म माय नेम इज खान का पुरजोर विरोध किया ।खासकर मुंबई में फिल्म की फिल्म की रिलीज़ को लेकर ख़ासा हंगामा हुआ और मुंबई को छावनी में तब्दील कर दिया । लेकिन इस घमासान का फायदा किसे हुआ ? दरअसल मुख्यमंत्री चौहाण के लिए मुंबई में फिल्म की रिलीज़ कराना नाक का सवाल था । लिहाज़ा यहाँ सीधे तौर पर सेना और सरकार के बीच वाकयुद्ध भी चलता रहा । सेना तो महारास्ट्र में अपनी खोई हुई ज़मीन तलाश रही है तो उसके द्वारा ये मुद्दा उछालना लाजिमी है। लेकिन सरकार ने इस मुडी पर खासी रूचि दिखाकर इसे सरकार के लिए नाक का सवाल बना दिया और सरकार इस मुद्दे पर कामयाबी में अपनी पीठ भी थपथपाई । जहाँ तक सेना का सवाल है सेना ने फिर मराठियों के बीच ये अहसास जगा दिया की अभी सेना ही मराठियों की हितैसी है । वहीँ इस पूरे प्रकरण में शाहरुख़ खान वाकई में बादशाह साबित हुए । माय नेम इज खान ने रिलीज़ से पहले ही अपनी प्रोमो और म्यूजिक के कांट्रेक्ट बेचकर खासी कमाई कर ली थी । औररिलीज़ के दिन तो सेना के विरोध के कारन पूरे देश में फिल्म को जबरदस्त सपोर्ट मिला। और पहले हफ्ते में ही फिल्म के सभी शो हाउसफुल चल रहे हैं । इस पूरे प्रकरण में शाहरुख़ की तो चांदी ही चांदी है।

अब इस हो हल्ले के दुसरे पक्ष पर गौर करते हैं । जब सेना शाहरुख़ का पुरजोर विरोध कर रही थी तो पवार साहब बेमतलब इस खेल में कूद गए थे । होना क्या था कांग्रेस के साथ गठबंधन के बात जो कुछ प्रभाव उनका बना भी था सेना प्रमुख बाला साहेब से मुलाक़ात कर उन्होंने खो दिया । कहने को तो पवार अपनी चाल चलकर कांग्रेस पर दबाव बनाना चाहती थी लेकिन सेना से नजदीकियों के कारन उन पर राज्य की राजनीती का लोभ हावी दीखता है । अब बात नफे नुक्सान की हो रही है तो यहाँ पवार का तो सौ फीसदी नुक्सान ही हुआ है ।

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