Wednesday, February 24, 2010

सबसे आगे हिन्दुस्तानी....

सबसे आगे हिन्दुस्तानी....
चार्ल्स लांगवेल्ट की गेंद को जैसे ही सचिन ने पॉइंट की दिशा में खेल कर रन पूरा किया , ग्वालियर का रूप सिंह मैदान गवाह बन गया एक ऐसे इतिहास का जिसको पार पाना शायद इस समय किसी बल्लेबाज़ के वश में नहीं है। वनडे क्रिकेट के इतिहास का पहला दोहरा शतक लगाने के लिए सचिन को भी खुद २० साल तक ४४२ मैचों का इंतज़ार करना पड़ा। अब सचिन सईद अनवर और चार्ल्स कोवेंट्री को पीछे छोड़कर सबसे आगे हो गए हैं । और हम सब हिन्दुस्तानियों को भी गर्व से सर उठाने का मौका देते हैं जिससे की हम कह सके की सबसे आगे हैं हिन्दुस्तानी। कहते हैं की अगर लगन पक्की हो तो उम्र का कोई असर नहीं होता । ग्वालियर में सचिन की फिटनेस लाजवाब थी । पूरे ५० ओवर तक खेलना और उसमे भी दौड़कर १ और दो रन लेना सचिन की बेमिसाल फिटनेस की गवाही देते हैं। रिकार्डों के शिखर पर खड़े सचिन के मन में न जाने अब कौन सी ख्वाहिशें बाकी हैं । अब वो जिस दिन भी मैदान में उतरते हैं एक रिकॉर्ड उनके नाम होता है। २० सालों से लगातार देश के लिए खेलने का जज्बा ही उनको हर दिन बेहतर खेलने के लिए प्रेरित करता है । सचिन ने मैं मैनऑफ़ द मैच लेते हुए भी कहा की उनका यह डबल धमाका देश को समर्पित है .पिछले २० सालों से अनवरत खेलते हुए सचिन २०११ विश्व कप जीतकर देश को सबसे बड़ा तोहफा देना चाहते हैं । इसमें कोई शक नहीं की सचिन जिस फॉर्म में इस समय हैं उसको देखते हुए यह काम मुस्किल नहीं है । इस समय २००९-१० के सचिन १९९८-९९ वाले सचिन ही नज़र आ रहे हैं । उनमे वही जोश नज़र आ रहा है जो १२ साल पहले था । लेकिन कहते हैं की जब कोई चिराग बुझने को होता है तो वह अपने आखिर लम्हों में पूरे सवाब पर होता है । सचिन के साथ भी कुछ ऐसा ही तो नही? क्योंकि सचिन अब पूरे सवाब पर हैं और शायद २०११ के मिशन के बाद वो रितैर हो सकते हैं । लेकिन दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमी भी मेरी तरह यही चाहते हैं की शतकों के शतक लगाकर भी यह रिकॉर्ड मास्टर रोज़ यूं ही हिन्दुस्तानियों का सर ऊँचा करता रहे। क्रिकेट जगत के इस कोहिनूर की चमक सदा चमकती रहे यही मेरी दुआ है।

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