फिर दिल दिया और टूट गया......
पहले वीरेंदर सहवाग ,फिर राज्यवर्धन राठौर और अभिनव बिंद्रा भी। जी हाँ तमाम भारतीय सितारों ने भारतीय हॉकी को रसातल से उबारने के लिए जोर शोर से कहा की फिर दिल दो हॉकी को । क्रिकेट की खुमारी में डूबी जनता ने भी रास्ट्रीय खेल के प्रति पूरी निष्ठा दिखाई । दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में अपेक्षा से अधिक लोगों ने भारतीय टीम का हौंसला बढ़ने के लिए अपनी उपस्तिथि दर्ज की। दरअसल लगातार गर्त में डूबती जा रही हॉकी को फिर से जिन्दा करने के लिए इस तरह का सपोर्ट भी जरूरी था । सभी हॉकी प्रेमी मैदान पर या टी वी पर हॉकी की गरिमा को जिन्दा रखने के लिए अपना समय देते रहे। और जब हमने पकिस्तान को पहले ही मैच में धो दिया तो जज्बा और भी बढ़ गया , पूरा हिन्दुस्तान सब कुछ भूलकर ये कहने लगा की अब दिल दो हॉकी को । शायद हमने ये उम्मीद लगा दी थी की अब तो बाजी हम ही मारेंगे। पर उसके बाद क्या हुआ सभी जानते हैं। पकिस्तान पर हमारी जीत की खुमारी को ऑस्ट्रेलिया ने अगले ही दिन उतार दिया । शर्मनाक तो ये रहा की हम कमजोर डिफेंस के कारण६ मिनट में ही २ गोल खा बैठे। उसके बाद भी हमने पेनाल्टी कॉर्नर गवाए । और मैच ५-३ से हार गए । यही सिलसिला स्पेन के साथ भी रहा यहाँ भी गोल का अंतर इतना ही था। और यहाँ भी हमने कई गलतियाँ की। रही सही कसार इंग्लैंड ने हमें ३-२ से धोकर पूरी कर दी । इन तीनो मैचों में हमारा डिफेंस बेहद खराब था जो की यूरोपीय खिलाडियों के लिए एक अच्छा संकेत था और वो गोल पर गोल दागते रहे।
टीम इंडिया सेमी फ़ाइनल में पहुँचने की आस तो पहले ही खो चुकी थी लेकिन अब इंग्लैंड से हारकर अंतिम ८ के लिए भी संघर्ष कर रही है।
कहने की जरूरत नहीं कि टीम के इस प्रदर्सन से लाखों हॉकी प्रेमियों को कितना दुःख हुआ । जो लोग हॉकी को दिल देने के लिए बेक़रार थे अब उनका दिल टूट चुका है । तमाम विवादों में पहले से घिरी हॉकी के लिये ये प्रदर्शन जले पर नमक छिड़कने जैसा ही है और इसके जिम्मेदार सिर्फ खिलाडी ही हैं।
Sunday, March 7, 2010
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